जलग्रहण विकास में सूचना प्रौद्योगिकी

(द्वारा -  वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा
किताब - जलग्रहण विकास-क्रियान्यवन चरण, अध्याय - 08)
सहयोग और स्रोत - इण्डिया वाटर पोटर्ल-


||जलग्रहण विकास में सूचना प्रौद्योगिकी||


जलग्रहण विकास परियोजनाओं का क्रियान्वयन देश में विभिन्न वित्तपोषी संस्थाओं के माध्यम से उनके द्वारा निर्धारित मापदण्डों एवं मार्गदर्शिका अनुसार किया जा रहा हैं। जलग्रहण कार्यक्रमों के समयबद्व क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने, गुणवत्ता की पुष्टि करने, नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा, वह भी गतिविधिवार भौतिक एवं वित्तीय, विभिन्न स्तरों पर किये जा रहें, परिणामों का आंकलन करने, समय पर  राशि आवंटन करने, राशि का उपयोग सुनिश्चित करने इत्यादि के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार की सूूचनाओं का एक स्तर से दूसरे स्तर तक सम्प्रेषण किया जाता है। जलग्रहण क्षेत्र से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार की सूचनाओं की आवश्यकता समय, स्थान एवं वित्तीयपोषी संस्थाओं की मांग एवं आवश्यकतानुसार बदलती रहती है, जिस हेतु समय-समय पर विभिन्न प्रपत्रों में सूचना प्राप्त की जाती है। जलग्रहण विकास की प्रगति से संबधित विभिन्न प्रपत्र प्रचलित मार्गदर्शिकाओं के अनुसार, भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा चाहे अनुसार समय समय पर बदलते रहते हैं परन्तु मुख्य उद्देश्य यह होता है कि जलग्रहण से जुडी़ समस्त गतिविधियों के अन्तर्गत भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा की जावें।


आज के बदलते युग में जबकी इलेक्ट्रॅानिक साजोसामान जैसे कम्प्यूटर, इन्टरनेट, -मेल इत्यादि आम तौर पर प्रयोग में रहें हैं तब जलग्रहणों से सम्बन्धित सभी प्रकार की सूचनाएं एवं डाटा का सम्प्रेषण संधारण आसान होता चला गया है। इन्टरनेट के माध्यम से आज हम इस स्थिति में है कि किसी भी विषय की विस्तृत जानकारी किसी भी स्थान पर बैठकर प्राप्त कर सकते हैं, अनुभवों का आदानप्रदान कर सकते हैं। जलग्रहण विकास कार्यक्रमों के सम्बन्ध में अभी भी इलेक्ट्रॅनिक माध्यमों का उपयोग कर बहुत कार्य किया जाना बाकी है। जलग्रहण कार्यक्रमों की समीक्षा एवं प्रबोधन हेतु भिन्न-भिन्न संस्थाओं द्वारा  साफ्टवेयर तैयार किये हैं जिनमें प्रगति फीड की जाती है एवं सूचना एक से अधिक स्थानों पर उपलब्ध हो जाती है। कम्प्यूटर के नेटवर्क स्थापित किये जाकर डेटा सेयरिगं का कार्य आसान हो गया है। जलग्रहण कार्यक्रमों में आमतौर पर 30-40 भिन्न-भिन्न प्रकार की गतिविधियाँ भिन्न-भिन्न विधियों के माध्यम से की जाती हैं, वह भी वर्ष के पृथक-पृथक मास में। जलग्रहण से जुडें अन्तिम स्तर कें कार्यकर्ताओं को तकनीकी रूप से दक्ष करना एवं उन्हें वाछितं सुविधाएं सूचना तैयार करने हेतु स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना जरूरी हो जाता है।


राज्य में पंचायती राज विभाग के माध्यम से करिश्मा  साफ्टवेयर तैयार किया गया है जिसमें समस्त प्रकार की सूचनाएं पंचायत समिति/ जिला स्तरों से उच्च स्तरों पर भेजी जाती हैं। राज्य में कार्यरत जलग्रहण  विकास विभाग के स्तर पर भी विभिन्न योजनान्तर्गत प्रगति की नियमित समीक्षा हेतु प्रपत्रों का निर्धारण किया गया है तथा जिला परिषदों के स्तर से निर्धारित प्रपत्रों -मेल के माध्यम से सूचंनाएं राज्य स्तर पर प्राप्त की जाकर उनका विश्लेषण किया जाता है एवं सूचनाएँ उच्च स्तर पर भेजी जाती है राज्य सरकार के स्तर से विभिन्न जिलों को नियमित रूप से फीड बैक दिया जाता है कि किस प्रकार की कमियाँ उनके जिले में पाई गई हैं एवं किस प्रकार उन्हें दूर किया जावे जिससे कि जलग्रहण विकास कार्यक्रमों का क्रियान्वयन प्रभावी रूप से पूर्ण हो सके।


भारत सरकार के स्तर से भी नाॅलेज पोर्टल के माध्यम से जलग्रहण क्षेत्रों की सूचना सीधे ही प्राप्त की जाती है। इस अध्याय में आगे जलग्रहण विकास से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के प्रपत्र बताये जा रहें हैं। अभ्यास कार्य के रूप में विद्यार्थी ज्ञानवद्र्वन की दृष्टि से अपने निवास स्थान के निकट चल रहे किसी जलग्रहण क्षेत्र से सम्बन्धित डेटा इन प्रपत्रों में भर सकते हैं। इससे जहाँ एक ओर व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त होगी वहीं दूसरी ओर प्रायोगकि अनुभव प्राप्त होगा।


11 वी पंचवर्षीय योजना अवधि हेतु जारी नई कामन मार्गदर्शिका के अनुसार योजना की प्रगति हेतु प्रपत्र निर्धारित किये गये हैं। जलग्रहण स्तर से सीधे आन लाईन प्रगति कम्प्यूटर में भारत सरकार की वैब साइट पर फीड की जाती है तथा प्रत्येक स्तर पर कार्यो की समीक्षा संभव हो सकती है।


8.2 जलग्रहण कार्यक्रम में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग  (     )


वर्तमान में कुछ संगठनों द्वारा जलग्रहण कार्यक्रम में सूचना प्रौद्योगिकी का सफल प्रयोग किया जा रहा है। जी. आई. एस. आधारित अनेकों साॅफटवेयर, प्रोग्राम आजकल उपलब्ध हैं जो कि जलग्रहण की प्रगति आदि के लिए योजना निर्माण, क्रियान्वयन, प्रलेखन, प्रतिवेदन दक्षता सुधार कर सकते हैं। यह उचित होगा यदि ग्राम स्तर पर अपेक्षित सूचना प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने के प्रयास किये जायें, इससे समुदाय को सशक्त बनाने लेन-देन में पारदर्शिता लाने में सहायता मिल सकती है। जहाँ कहीं आवश्यकता हो, वित्तपोषण संस्था/राज्य सरकार द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी विकसित करने हेतु वांछित साजोसामान उपलब्ध करवाये जाने चाहिए। सूचनाओं का प्रबन्धन यदि सुव्यवस्थित, नियमित होगा तो प्रबन्धकों के स्तर पर कार्यक्रमों की समीद्यक्षा के साथ साथ-' भविष्य हेतु नीति निर्माण का कार्य आसान हो सकेगा।


सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग जलग्रहण विकास कार्यो में इस प्रकार किया जाना चाहिए जिससे कि जलग्रहण से जुडें कार्यकर्ताओं का बहुमूल्य समय अनेकानेक प्रकार की सूचनाएं तैयार करने में ही नहीं व्यतीत हां अपितु स्थानीय जन समुदाय से उनका वार्तालाप, समन्वय, सम्बन्धों में निरन्तरता बनाये रखने हेतु उन्हें पर्याप्त समय मिलें। कार्यक्रम क्रियान्वयन कर्ताओं की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे अपना डेटा बैंक सुव्यवस्थित रूप से तैयार करें, नियमित संधारण करें एवं किसी प्रकार की ढिलाई आगे से आगे समस्याएं उत्पन्न करती जायेगीं।


8.3 जलग्रहण विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की सूचनाओं का निर्धारित प्रपत्र    


जलग्रहण विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार की सूचनाओं एवं निर्धारित प्रपत्रों का विवरण निम्न प्रकार दर्शाया गया हैं। ये सूचनाएं विभिन्न स्तरों, जैसे ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद इत्यादि से राज्य स्तर पर तथा राज्य स्तर से केन्द्रीय सरकार के स्तर पर प्रत्येक माह/ त्रैमास अथवा मांग अनुसार भिजवाई जाती है।


8.6 संदर्भ सामग्री   (   )



  1. जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग के वार्षिक प्रतिवेदन।

  2. प्रशिक्षण पुस्तिका - जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग द्वारा जारी

  3. जलग्रहण मार्गदर्शिका - संरक्षण एवं उत्पादन विधियों हेतु दिशा निर्देश - जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग द्वारा जारी

  4. जलग्रहण विकास हेतु तकनीकी मैनुअल - जलग्रहण विकासण् एवं भू संरक्षण विभाग द्वारा जारी।

  5. राजस्थापन में जलग्रहण विकास गतिविधियाँ एवं उपलब्धियाँ - जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग।

  6. कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय जलग्रहण विकास परियोजना के लिए जलग्रहहण विकास पर तकनीकी मैनुअल

  7. ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी जलग्रहण विकास - दिशा निर्देशिका

  8. ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी जलग्रहण विकास - हरियाली मार्गदर्शिका

  9. जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग द्वारा जारी

  10. विभिन्न परिपत्र - राज्य सरकार जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग द्वारा जारी।

  11. जलग्रहण विकास एवं भू सरंक्षणप विभाग द्वारा जारी स्वयं सहायता समूह।

  12. कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी वरसा जन सहभागिता मार्गदर्शिका

  13. भारत सरकार द्वारा जारी नई कामन मार्गदर्शिका ।