गंगा : ज्ञानवाहिनी

गंगा : ज्ञानवाहिनी


हिमालय और गंगा अनादिकाल से भारत की आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक चेतना की कर्मस्थली हैं। ऋषि-मुनियों तथा मनीषियों ने वैदिक ऋचाएँ, उपनिषद्, गीता, ब्रह्मसूत्र की ऋचाएं,- पौराणिक धर्म गाथाएँ हिमालय की कन्दराओं तथा गंगा तट पर ही लिखी हैंहिमालय को महाकवि कालिदास ने 'देवतात्मा' कहकर पुकारा हैगीता में श्रीकृष्ण ने अपनी सम्पूर्णता एवं व्यापकता का परिचय इस प्रकार से दिया है, यथा- पार्थ ! मैं स्थावरों में हिमालय हूँ (स्थावराणां हिमालयः) और सरिताओं में मैं गंगा हूं (स्रोतसामास्मि जाह्नवी)वाण भट्ट ने 'हर्ष चरित' में गंगा की निर्मलता तथा हिमालय की शीतलता का वर्णन किया है। महाभारत के 'वन पर्व' और 'अथर्ववेद' में सुखमय जीवन के लिए हिमालय और गंगा की स्तुति की गई है।


गंगा : उत्सववाहिनी


गंगा : उत्सववाहिनी उत्तराखण्ड के लोगों का नदियों के प्रति सम्मान और श्रद्धा का भाव प्राचीनकाल से ही रहा हैउत्तराखण्ड है ही उत्सवों का प्रदेशमौसम में आए बदलावों के साथ ही यहां मानवीय रंगत भी मेले-त्योहारों के रूप में नवीनता का रंग उजागर करती है। नदियों के संगम पर मेलों के आयोजन इसी प्रयोजन से होते रहे हैं। बागेश्वर, देवप्रयाग, कर्णप्रयाग, उत्तरकाशी के माघ मेलों में स्नान का पुण्य प्राप्त करने दूर-दूर के लोग पहँचते हैंये पर्व जहाँ नदियों के प्रति आम जनमानस के श्रद्धाभाव को परिलक्षित करते हैं, वहीं विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक तथा आर्थिक परम्पराओं को समृद्ध करने की ऊर्जा भी इन्हीं नदियों की देन है।


उत्तराखण्ड के गांवों में बेटियां एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर जिस तरह झुमैला-चौंफुला, चांचरी जैसे पारम्परिक नृत्यों से अपना मनोरंजन करती हैं, ठीक उसी प्रकार गंगा भी उत्तराखण्ड की अन्य नदियों के साथ, हाथ से हाथ मिलाकर झुमैला-चौंफुला के पारम्परिक नृत्यों का आनन्द लेती प्रतीत होती है। इन नदियों ने हमारी सांस्कृतिक परम्पराओं को समृद्ध किया है। ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा महोत्सव में लाखों लोग एकत्र होकर सुख-शान्ति और आनन्द की अनुभूति करते हैं।


गंगा : ऊर्जावाहिनी


अपने उद्गम स्थलों से निकलते ही गंगा की धाराएं तेज गति से ऊर्जावान होकर संकरे, दुर्गम रास्तों से नाचती-कूदती, शोर करती निर्भीक होकर आगे बढ़ती हैं। वह हिमालय की पवित्र मूल्यवान उर्वरक मिट्टी तथा खनिज तत्वों को समेटकर अपने साथ ले जाती हैं और उत्तरी भारत के मैदानी क्षेत्रों में बिछाकर उसे उपजाऊ तथा समृद्ध हैगंगा सहित इसकी सहायक नदिया और स्थानीय गाड़ गरे उत्तराखण्ड की कृषि, पशुपालन, वानिकी एवं उद्योग धन्धों की आर्थिकी को समद्ध बनाती हैं। मानवीय जनजीवन को सुचारु एवं समृद्ध रूप में संचालित करने का प्रमुख आधार है गंगा।


स्रोत - उतराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री व मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा रचित 'विश्व धरोहर गंगा'