लड़कियों, महिलाओं के लिए यह समाज निरापद क्यों नहीं

||लड़कियों, महिलाओं के लिए यह समाज निरापद क्यों नहीं||




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क्या कोई लड़की सिर्फ इसलिए भी दरिंदगी का शिकार हो सकती है कि वह अपनी स्कूटी एक नियत जगह पर पार्क करती थी.हैदराबाद में पशु चिकित्सक प्रियंका रेड्डी के साथ हुई पाशविकता एक बार फिर समाज में मौजूद दरिंदों के भयानक चेहरे सामने लाती है. जितने ठंडे दिमाग से बलात्कारियों ने प्रियंका रेड्डी को शिकार बनाने की योजना बनाई,वह रौंगटे खड़े कर देने वाली.उसकी स्कूटी के टायर की हवा निकाली,फिर खुद ही मदद की पेशकश की और फिर बलात्कार और हत्या कर दी.


मदद के प्रस्ताव के पीछे भी दरिंदगी छुपी हो तो फिर इंसानियत कहाँ है?


प्रियंका रेड्डी मामले में अपराधियों को कठोर सजा होनी चाहिए. पर बड़ा सवाल तो यह है कि लड़कियों, महिलाओं के लिए यह समाज निरापद क्यों नहीं है? हर समय वे खतरे की जद में क्यों हैं? तमाम आधुनिकता के बावजूद यह वहशीपना जाता क्यों नहीं है ? (Indresh Maikhuri)


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प्रियंका रेड्डी के लिए
बताये क्या किया जाए, क्या यही रिश्ता बाक़ी कि आदमी शिकारी है औरत शिकार , तो हमने क्यों बनाये बाक़ी रिश्ते, जब उसी आदिम युग में जाना था तो क्यों ये सभ्यताएं क्यों ये तरक्की का हवाला क्यों ये धर्म ग्रंथ । क्यों ये समाज ।


और क्यों कोई आशा उम्मीद और किस बात की ।अब यदि सही जानवर तक पहुंच गये तो क्यों ये न्याय की देहरी पर या मानवता वादी कहने वालों के स्वांग।


जो जीवन नहीं समझता जो पीड़ा नहीं समझता उसे इंसान समझना भूल है ,इस भूल का फैलाव बड़ा है। यहां तक पहुंचने की कीमत बहुत बड़ी है। हमने राजनीतिक महत्वाकांक्षाऔर धर्मों की सड़न और तकनीक के मूल्य रहित निर्भरता को चुना और जीत की पौरुषिकता को जश्न ,ताकत को ही मान्यता दी।


नष्ट करते चले गए उन बारीक अभिव्यक्ति,कला, के धैर्य को उन ममत्व अपनत्व के स्पर्श को प्रकृति के धैर्य की परीक्षा भी ले चुके , यूं ही नहीं कहा कि तुम जब उस पराकाष्ठा पर पहुंच चुकोगे तो फिर नाश होना तय है तुम्हारी विजित हर चीज़ तुमसे कीमत वसूल करेगी। यह याद रखना कि संतुलन के लिए नियम , कानून को कुदरत तय करती है ... तुम्हारी यात्रा मुकाम ,जीत खुशी कुछ हो पर मुस्तकबिल कुदरत तय करेगी. (Hemant bora)


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देश निशब्द और शर्मिंदा है डॉ प्रियंका रेड्डी!
तेलंगाना में डॉ प्रियंका रेड्डी के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसे जिंदा जला दिया, उससे पूरा देश सदमे में है। हाल के वर्षों में ऐसी असंख्य लोमहर्षक ख़बरों के साथ जीने को हम अभिशप्त हैं। ऐसा लग रहा है जैसे हम यौन मनोरोगियों के देश में हैं जिसमें रहने वाली समूची स्त्री जाति के अस्तित्व और अस्मिता पर घोर संकट उपस्थित है। आज सवाल हर मां-बाप के मन में है कि इस वहशी समय में वे कैसे बचाएं अपनी बहनों-बेटियों को ?


उन्हें घर में बंद रखना समस्या का समाधान नहीं। अपनी ज़िंदगी जीने का उन्हें पूरा हक़ है। वे सड़कों पर, खेतों में, बसों और ट्रेनों में निकलेंगी ही। हर सड़क पर, हर टोले-मोहल्ले में, हर स्कूल-कालेज में पुलिस की तैनाती संभव नहीं है। आमतौर पर क़ानून और पुलिस का डर ही लोगों को अपराध करने से रोकता है। यह डर तो अब अब रहा नहीं। वैसे भी हमारे देश के क़ानून में जेल, बेल, रिश्वत और अपील का इतना लंबा खेल है कि न्याय के इंतज़ार में एक जीवन खप जाता है। दरिंदों के हाथों बलात्कार की असहनीय शारीरिक, मानसिक पीड़ा और फिर अमानवीय मौत झेलने वाली देश की हमारी बच्चियों और किशोरियों के लिए हमारे भीतर जितना भी दर्द हो, हमारी व्यवस्था के पास उस दर्द का क्या उपचार है ?


संवेदनहीन पुलिस, सियासी हस्तक्षेप, संचिकाओं में वर्षों तक धूल फांकता दर्द, भावनाशून्य न्यायालय, बेल का खेल और तारीख पर तारीख का अंतहीन सिलसिला। कुछ चर्चित मामलों को छोड़ दें तो सालों की मानसिक यातना के बाद निचले कोर्ट का कोई फैसला आया भी तो उसके बाद उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय और दया याचिकाओं का लंबा तमाशा! लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है।


देश में बलात्कार के लिए फांसी और उम्रकैद सहित कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान होने के बावज़ूद स्थिति में कोई बदलाव क्यों नहीं आ रहा है ? अगर बलात्कार पर काबू पाना है तो बलात्कारियों के खिलाफ एक तय समय सीमा में अनुसन्धान, ट्रायल और सजा के कठोर प्रावधानों के अलावा बेहद आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध अश्लील सामग्री को कठोरता से प्रतिबंधित करने के सिवा कोई रास्ता नहीं है।


कुछ लोगों के लिए अश्लील फ़िल्में देखना उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मसला हो सकता है, लेकिन जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता सामाजिक नैतिकता और जीवन-मूल्यों को तार-तार कर दे, वैसी स्वतंत्रता को निर्ममता से कुचल देना ही हितकर है। इसके सिवा और कोई उपाय नहीं है.


डॉ प्रियंका रेड्डी देश ही नहीं मानवता शर्मशार है! डॉ ध्रुव गुप्त की वाल से साभार - (Kusum Rwat)


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आप सोलो ट्रिप की बात करते हैं, बॉस हम उस देश में रहते हैं जहाँ घर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर लड़कियाँ ज़िंदा जला दी जाती हैं, बलात्कार करने के बाद.


मुबारक हो तेलंगाना सरकार के साथ भारत सरकार को भी. एक और लड़की जो डॉक्टर थी और अपने क्लिनिक से किसी पेसेंट को देख कर लौट रही थी. रास्ते में उसकी स्कूटर पंक्चर हो जाती है. वो अपनी बहन को कॉल करके बताती है कि स्कूटर सही नहीं हो रहा. छोड़ कर भी नहीं आ सकती क्योंकि कोई चुरा ले जाएगा. ऊपर से अग़ल-बग़ल से गुजर रहे एक-दो गाड़ी वाले अजीब नज़रों से घूर रहें मुझे डर लग रहा. ये बातें साढ़े नौ बजे रात, बुधवार को हो रही होती. फिर वो अपनी बहन को बताती है, दो अजनबी उसको हेल्प के लिए पूछ रहें तो वो उन पर भरोसा करके हाँ कर देती है. उसके बाद से उसका फ़ोन स्विच ऑफ़ आने लगता है. घर वाले रात को एक बजे मिसिंग का काम्प्लेन दर्ज करवाते हैं और अगली सुबह उन्हें अपनी बेटी की जली हुई लाश सड़क के किनारे पड़ी मिलती है.


तो है हमारा प्यारा और महान भारत. जहाँ साँझ ढले बेटियों के बलात्कार और ज़िंदा जलाने जैसे सुकर्म होते हैं. क़ानून-व्यवस्था का क्या ही कहना. बलात्कारी पकड़ाने के बाद भी सबूत के अभाव में छूट जाते हैं. कई बार इन्हें सिलाई मशीन दे कर छोड़ दिया जाता. और ज़्यादातर तो पकड़े नहीं जाते.


और हम सोशल मीडिया पर हैशटैग के साथ पोस्ट लिख कर भुल जाते हैं या अगली बलात्कार की घटना का इंतज़ार करते हैं.


मैं बहुत मुत्तमईंन हूँ इस केस के भी बारे में. यहाँ भी कुछ नहीं होने वाला. किसी को सजा नहीं मिलने वाली. मैं अपनी फ़्रस्ट्रेशन कम करने के लिए लिख रही हूँ क्योंकि इससे ज़्यादा मैं कुछ कर भी नहीं सकती.


आख़िर बलत्कारियों की ये फ़ौज भी तो हम ही तैयार करके दे रहें हैं न. वो कैसे इस पर डिटेल में कई बार लिख चुकी हूँ. अब नहीं लिखूँगी. बस वो माएँ, पत्नियाँ थोड़ा तो आज शर्म कर लें जो अपने आँचल के साये में कभी पुत्र-मोह तो कभी पति-मोह में आ कर इनकी हिफ़ाज़त कर रहीं. वैसेजान लीजिए जिस दिन आप भी अकेली में हाथ आ जाएँगी किसी के ये आपके साथ भी जाएगा.


सॉरी डॉक्टर! तुम एक बेहतर दुनिया, एक बेहतर देश डिजर्व करती हो! #RIPPriyankaReddy #justiceforpriyanka - Anu Roy - (Keshar singh bist)





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साधो,ये मुर्दों का देश।


समाज ,समाज सब बकवास है।
क्या सोच बैठे है आप सबकी लड़किया सुरक्षित है। बहुत बड़ी गलतफहमी में है। चुप रहिए मुर्दा जिस्म के साथ तमाशा देखिये ,आपके बीच मे हैवान है एक दिन नोच लेंगे,आप जानके भी मौन रहिए। क्योंकि बोलके बुरा क्यों बने , ये अच्छा बनने का ढोंग एक दिन कुछ बहुत अच्छा न बता जाए।समाज नामक संस्था अब सिर्फ चुनिंदा ठेकेदारों की जेब मे है,जो अपने हिसाब से चला रहे सारे नियम कानून को ताक पे रख के, उनसे उम्मीद करना भी बईमानी है, सबकी अपनी नेतागिरी अपने चमचे । मुर्दा लोग है जो अब किसीं काम के नही।


ट्विटर पर आज की टॉप ट्रेंडिंग है #RIPPriyankaReddy....एक युवा-खूबसूरत ही नहीं कर्मठ पशु चिकित्सक प्रियंका रेड्डी। तेलंगाना की युवती जो रात नौ बजे अपनी ड्यूटी से वापस आ रही है। स्कूटी पंचर देख, अपनी बहन को फोन करके कहती है...स्कूटी खराब है, डर लग रहा है। बहन, उस जगह से हटने और कैब लेने के लिए कहती है। कुछ देर में प्रियंका फिर अपनी बहन को फोन करके कहती हैः कुछ लोग मदद के लिए आए हैं। मैं देखती हूं।


छोटी बहन वापस फोन लगाती है...फोन स्विचऑफ....अनर्थ की आशंका और यह शंका-आशंका अब प्रियंका की बहन और उनके परिवार के लिए जीवन भर का झुलसता दर्द है। अब वे रोज उस दर्द की आग को महसूस करेंगे जिसमें उनकी होनहार-काबिल-सुंदर-डॉक्टर बहना-बिटिया का सामूहिक बालात्कार कर जिंदा जला दिया गया। हम हर बार शोक मनाते हैं....मोम्बत्तियां जलाते हैं...ट्विटर पर हैशटेग को टॉप ट्रेंड कराते हैं....सोशल पर रोते हैं...चिल्लाते हैं ....फिर अपने-अपने दायरे में सिमट जाते हैं। इस बार हैशटेग बदल ही जाना चाहिए....हमेशा के लिए...हमें अपने 'समाज को ही रेस्ट इन पीस' लिख देना चाहिए। जाए किसी 'कब्र में दफन' हो जाए।


😠 सोचिए ना, एक पढ़ी-लिखी काबिल युवती सिर्फ स्कूटी पंचर होने से डरने लगती है....क्यों....हम सब समाज में रह रहे हैं।
😠सोचिए ना, कुछ लोगों का समूह मदद के लिए आता है, वह विश्वास में आ जाती है...क्यों...हम सब समाज में रह रहे हैं ना।
😠कुछ लोगों का वह समूह दरिंदगी की हर हद पार करता है....क्यों....फिर वही हम समाज में ही रह रहे हैं ना।


यह समाज, यह समूह किस काम का...क्यों ना इसे दफना दिया जाए। रेस्ट इन पीस कहकर...क्योंकि आज फिर जब हम सब मातम मना रहे हैं....हमारे ही देश में...हमारे ही प्रदेश में...हमारे ही शहर में...हमारे ही समाज में....किसी और काबिल प्रियंका के शरीर पर दुर्दांत रूप से कब्जा कर उसे जिंदा आग के हवाले किए जा रहा होगा....सच #RIP_समाज...कम से कम तुम्हारे होने का भ्रम तो खत्म हो।


( फोटो गूगल से साभार ...जिस फोटो को फेसबुक कवर कर रहा है...वह प्रियंका के साथ गुजरा दुर्दांत सच है...उसके परिवार के हर सदस्य के लिए हर दिन नरक की आग से गुजरने जैसी यातना है....)


#RIPPriyankaReddy #RIP_समाज  (श्रुतिअग्रवाल #RIP_samaj #Snehababa)