'कोरोना अब ना करो'


'कोरोना अब ना करो'


कोरोना-कोरोना अब करो ना,
इस बीमारी से तुम डरो ना।
माना ये भयंकर है बीमारी, 
पूरी दुनिया है इसकी मारी।
किन्तु इससे बचने का एक उपाय, 
थोडी सी सावधानी बरती जाय।
पहले इस बीमारी को जान लो,
क्या-क्या हैं लक्षण पहचान लो।
पूर्ण जानकारी, थोडी सावधानी,
अब हम सबको को है अपनानी।
विश्वास ये मन में जगाना होगा , 
बीमारी से सबको बचाना होगा।
आओ मिलजुल कर करें पहल,
निश्चय मन में करें अटल।
जब भी मिलें इक दूजे से, 
हाथों को न मिलायें हम।
नमस्कार है संस्कृति अपनी,
फिर से इसे अपनायें हम।
कंठ में हो महसूस, गर पीड़ा,
और बदन में हो अकड़न ।
वेद भी सदियों से कहते हैं,
कर लो गर्म पानी का सेवन।
घर पर ही न करो विमर्श,
डाॅक्टर का लो उचित परामर्श।
रोगी से भी बनानी होगी दूरी,
ये सभी उपाय हैं बहुत जरूरी।
घबराने से नहीं बनेगी बात,
सावधानी से दो कोरोना को मात।


यह कविता काॅपीराइट के अंतर्गत आती है, कृपया प्रकाशन से पूर्व लेखिका की संस्तुति अनिवार्य है।