नीम-हकीम की बजाय चिकित्सा पद्धति को मानिए

||नीम-हकीम की बजाय चिकित्सा पद्धति को मानिए||


कोराना वायरस के चलते देशभर में लाॅकडाउन है। कारण इसके लोगो को थोड़ी-बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं। एहतियात के तौर पर प्रशासन द्वारा जरूरी आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए चार घण्टे की ढील दी जा रही है। पर दूसरी तरफ देशभर में ही कुछ लोग सोसल मीडिया में भ्रामक प्रचार से बाज नहीं आ रहे है। इसलिए स्थिति को समझने की आवश्यकता है की नीम-हकीम की बजाय चिकित्सा पद्धति पर भरोसा कीजिए। 



अपवाहों से बचना होगा
ज्ञात हो कि वर्तमान में सोसल मीडिया में कोरोना वायरस को लेकर सर्वाधिक भ्रामक प्रचार-प्रसार आने लग गया है। कई प्रकार की वीडियों प्रसारित हो रही है कि कोरोना वायरस के इलाज हेतु घरेलू नुस्खे ही कारगर दवा है, कुछ लोग लहसून आदि जैसे खाद्य सामग्री का अत्यधिक उपयोग करना बता रहे है आदि आदि। कुछ लोग तरोड़-मरोड़कर समाचार परोस रहे हैं कि कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है, और लाॅकडाउन की समय सीमा अगले तीन माह तक बढ सकती है वगैरह। ऐसा कुछ भी नहीं है। विशेषज्ञो कहना है कि सभी को ऐहतियात ही बरतनी होगी। खुद को सुरक्षित रखने के जो उपाय हैं जैसे सामाजिक दूरियां आदि। भीड़ का हिस्सा ना बने, लाॅकडाउन का समर्थन करें। जो जहां पर है वही रहकर इस सूक्ष्म समय में संयम का ख्याल रखे। जैसे कार्य हमें करने होंगे। यही नहीं बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी अपवाहों की चपेटे में लोगो को नहीं आना चाहिए।


चिकित्सा पद्धति पर विश्वास


एम्स दिल्ली के वरिष्ठ चिकित्सक डा॰ सन्दीप सलूजा ने आॅल इण्डिया रेडियों में अपने साक्षात्कार में बताया कि देश के लोग इस वक्त कठिन परिथतियों से गुजर रहे हैं। इसकी सुरक्षा के लिए हमे ही हमारी सुरक्षा करनी होगी। कहा कि कोरोना जैसे वायरस के लिए अपने देश में कोई कारगर उपाय ईजाद नही हो पाया है। इसलिए भविष्य में इसके उपचार के संसाधन ढूंढ निकाल लिए जायेंगे। उन्होंने कहा कि इस वक्त सर्वाधिक गलत अपवाहों से हमें बचना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कोरोना वायरस की समाप्ती के लिए कोई घरेलू नुस्खे नहीं है। यह भी कहा कि बिना चिकित्सिकीय जांच के किसी भी गलतफहमी का कोई भी नागरिक शिकार ना हो। उन्होंने अगाह किया कि इस वक्त लोगो को यह भी समझना है कि भोजन को सन्तुलित ढंग से खायें, समय पर खायें और कम से कम खायें। क्योंकि यह आपातकाल की स्थिति है। ताकि भविष्य में हम लोग किसी दुष्परिणाम के शिकार ना हों।



आधा-अधूरी विषयवस्तु
जानकारो का कहना है कि सोसल मीडिया का दुरपयोग इस मायने में हो रहा है कि अनजान लोग यानि उस विषय के वे जानकार नहीं है किन्तु वे उस विषय को अधूरी जानकारी से परोस देते है। इतनाभर नहीं कुछ लोगो को सोसल मीडिया पर अपने लाईक, कमेंट, और ब्यूवर बढाने हैं। इस तरह की विषय वस्तु पर सोसल मीडिया जैसे मजबूत फ्लेटफार्म को और शख्त होने की आवश्यकता है। यूट्यूब, फेसबुक, व्हाट्सएप, मैसेन्जर, लाईकी, टिकटाॅक या अन्य कोई सोसल मीडिया के फ्लेटफार्म हों, उन पर भविष्य के लिए निगरानी करने के कड़े कानून बनने चाहिए। ताकि बेवजह और अपवाहों पर रोक लग सके। जानकारो की सलाह है कि यही सही वक्त है इन विभिन्न फ्लेटफार्मो से जुड़े उपयोगकर्ताओं की विषयवस्तु को सुधारने की। वरना भविष्य में यही विषय किसी महामारी से कम नहीं होंगे।