अभिनव पहल: घर बैठे मिली मटर की कीमत


||अभिनव पहल: घर बैठे मिली मटर की कीमत||


वैश्विक महामारी के चलते पूरी दुनियां के लोग अपने-अपने स्तर से बचाव का कार्य कर रहे हैं। इधर उत्तराखण्ड सरकार ने भी कैबिनेट की बैठक करके लाॅकडाउन को 13 मई तक यथा रखने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेज दिया है। ऐसे में केन्द्र सरकार के फैसले पर अब लोगो की निगाहे टिकी हुई है। खैर! इस लाॅकडाउन के दौरान कुछ लोग और संगठन उल्लेखनीय कार्य कर रहे है। जिसकी शुरूआत सीमान्त जनपद उत्तरकाशी से हो गई। 


बता दें कि साल 2010 और 2013 के दौरान उत्तरकाशी बुरी तरह से आपदा की चपेट मे आया था। इस दौरान जाड़ी संस्थान, रिलायंस फाउंडेशन, रेणुका समिति व भुनेश्वरी महिला आश्रम के कार्यकर्ताओं ने मिलकर ‘‘आपदा प्रबंधन जन मंच’’ का गठन किया है। तब से लगातार मंच से जुड़े स्वयंसेवी आपदा की घड़ी में लोगो के साथ खड़े रहते है।



अस्थाई व वैकल्पिक बाजार 
वर्तमान में कोरोना वायरस के चलते लाॅकडाउन है। सीमान्त जनपद उत्तरकाशी की नगदी फसल खेतो मे ही खराब होने की कगार पर आ चुकी है। सो आपदा प्रबंधन जन मंच के कार्यकर्ताओं ने कमर कसी और काश्तकार के खेतो से ही इस नगदी फसल को बाजार तक पंहुचाने का नायाब तरीका निकाला। इस संगठन ने जिला प्रशासन से कार्यकर्ताओं के लिए पास की गुजारिश की, कि वे काश्तकारो की मटर की फसल को बाजार तक पंहुचाना चाहते है। उन्होने सबसे पहले जिला मुख्यालय के आसपास के गावों के काश्तकारो की मटर की फसल को एकत्रित किया और क्लेक्ट्रेट के आवासीय परिसर और अन्य सरकारी विभागों के आवासीय परिसर तक मटर की फसल को पंहुचाया। जिसको लोगो ने हाथो-हाथ खरीदा है।


अच्छी शुरूआत
आपदा प्रबंधन जन मंच उत्तरकाशी, जाड़ी संस्थान, रिलायंस फाउंडेशन, रेणुका समिति, भुनेश्वरी महिला आश्रम द्वारा संयुक्त रूप से इस आपदा की घड़ी में स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर निरन्तर कार्य कर रहे हैं। इधर संगठन के कार्यकर्ताओं ने अभिनव प्रयोग किया है। रबी के इस सीजन में मटर की फसल तैयार है। मगर लाॅकडाउन है, तो इस फसल को बाजार मिलना मुश्किल था। सो संगठन के सदस्यों ने खेत से लेेकर उपभोक्ता तक पहुंचने की योजना बना डाली। प्रशासन से स्वीकृति प्राप्त की। अतः विकास भवन उत्तरकाशी, निम उत्तरकाशी, आईटीबीपी उत्तरकाशी, कलेक्टरेट एवम् सब्जी मंडी में संपर्क किया गया। फलस्वरूप इसके एक गांव से आरम्भ हुए इस प्रयोग से अब तक डुण्डा ब्लॉक अन्र्तगत 10 गांव के लगभग 40 किसान जुड़ चुके हैं। लगभग 35 कुंतल मटर के बाजारीकरण से किसानों को लगभग 115000 की धनराशि घर बैठे प्राप्त हो चुकी है। 


पंहुच बनाने में सफल
ग्रामीण किसानों का कहना है कि इस मुसीबत की घड़ी में उनकी नगदी फसल बरबाद होने की कगार पर थी। वे मायूस थे कि अब तो उन्हे इस वर्ष आर्थिक आपदा का सामना करना पड़ेगा। किन्तु संगठन के कार्यकर्ताओं ने उनकी फसल का मूल्य उनके घर तक पंहुचाया। नगदी फसल से मिली धनराशि उनके लिए बहुत मददगार साबित हो रही है। संगठन के अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद सेमवाल का कहना है कि वे इस प्रयास को तब तक जारी रखेंगे, जब तक किसानों की समस्त बाजार योग्य फसल की बिक्री ना हो जाए। रिलायंस फाउंडेशन के कमलेश गुरुरानी के अनुसार खेती यहां के मझौले किसानो के लिए आर्थिकी की रीढ़ है। इस विकट परिस्थिति में संगठन का काम और बढ जाता है। रेणुका समिति के श्री संदीप उनियाल कहते हैं कि किसान को वे सभी खर्चे काट कर उनके मटर की कीमत 28 से 30 रुपया प्रति किलो हिसाब से उनके घर तक पंहुचा रहे है। इस मुहिम में राखी राणा, रमेश चमोली, पालीवाल जैसे युवा मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।