कोरोना संकट: बीमा तो दूर उल्टा मानदेय काट दिया

||कोरोना संकट: बीमा तो दूर उल्टा मानदेय काट दिया||



कोरोना महामारी में सर्वाधिक जनसेवा की मिशाल कायम कर रहे देहरादून के सफाईकर्मी अपने विभाग के ही शिकार हो गये हैं। भारत सरकार की गाईडलाईन के मुताबिक उनका बीमा होना था, सो बीमा तो हुआ नहीं बल्कि नगर निगम देहरादून के सुपरवाईजरो ने उनकी तनख्वा ही काट दी है। अब इस आमानवीय हरकतो पर बोलने पर कोई भी लोक सेवक हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।


ज्ञात हो कि कोरोना संकट में इस दौरान पुलिसकर्मी, स्वाथ्यकर्मी और सफाईकर्मी ईश्वर के रूप में जनसेवा की नई ईबारत लिख रहे है। देश के अलग-अलग प्रदेशो की सरकारो ने इन ईश्वररूपी सेवको के लिए बीमा अथवा दुगुनी मानदेय की व्यवस्था की है। हरियाण की सरकार ने सफाईकर्मीयो का मानदेय लाॅकडाउन तक दुगुनी कर दी है, साथ ही दुर्घटना पर 50 लाख का बीमा भी कर दिया है। दिल्ली व उत्तरप्रदेश की सरकारो ने भी अपने प्रदेश के सफाईकर्मीयों को दुर्घटना के दौरान 50-50 लाख का बीमा करवाया है। इधर स्वास्थ्यकर्मीयों का बीमा केन्द्र सरकार ने कर दिया है। 


उत्तराखण्ड सरकार ने भी सभी स्थानीय निकायों से सफाईकर्मीयों की सूची मांगी है, मगर अब तक बीमा की कार्रवाई पूरी नहीं की गई। बल्कि इस विषय पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी बात करने के लिए तैयार नहीं है।


हालांकि राज्य सरकार ने कोरोना ड्यूटी में लगे लोगों को बीमा सुविधा का ऐलान किया हुआ है। इस दौरान यदि किसी कर्मचारी की कोरोना से मृत्यु हो जाती है तो दस लाख रुपये का बीमा देने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की है। इसके साथ ही फ्री इलाज की भी सुविधा है। इसमें स्वास्थ्य कर्मी, पत्रकार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ती और अन्य विभागों के ऐसे कर्मचारी हैं जो कोरोना ड्यूटी कर रहे हैं।
गौरतलब हो कि शहरी विकास विभाग ने सभी स्थानीय निकायों के सफाई कर्मियों की सूची बनाने में तेजी दिखाई, कि वे सफाई कर्मियों का बीमा करने जा रहे है। किन्तु अब तक विभाग सफाई कर्मियों के बीमा की योजना पर कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है। ज्ञातव्य हो कि राज्य में 91 शहरी स्थानीय निकायों में आठ नगर निगम, 41 नगर पालिका परिषद और 42 नगर पंचायतें हैं। इनमें लगभग आठ हजार सफाईकर्मी कार्यरत हैं, जो मौजूदा समय में अपनी जान की परवाह किये बगैर कोरोना की जंग में मैदान में डटे है। अतएव वे सर्वाधिक संवेदनशील काम कर रहें है।


स्थानीय निकायों में कार्यरत सफाईकर्मीयों का कहना है कि उनके पास अब तक कोई ऐसी सूचना नहीं आई है कि उनका बीमा हो चुका है। स्थानीय निकायों में तैनात प्रशासक भी सफाईकर्मीयों के बीमा बावत कोई स्पष्ट जबाव नहीं दे पा रहे है। कोरोना महामारी के इस दौर में फ्रन्टलाईन के कर्मचारियो हेतु भावनात्मक घोषणाऐं हो रही है। हौंसलाफजाई भी हो रही है। मगर सुरक्षा कवच के रूप में सरकारी वायदे सीफर होते दिखते हैं।