स्मृति शेष : सब कुछ इतने अचानक हुआ


देहरादून डिस्कवर के संस्थापक, संपादक दिनेश कण्डवाल आज पंचतत्व मे विलीन हो गये। उन्हे उनके दोनो बेटों ने सोसल मीडिया के मंच पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। 

||सब कुछ इतने अचानक हुआ||

 

पापा आज पंच तत्व में लीन हो गए, सब कुछ इतने अचानक हुआ कि सोचने समझने का वक़्त तक नही मिला। पिता से ज्यादा आप दोस्त की तरह रहे, शायद इसलिए कभी कोई बात आपसे बोलने के लिए दो बार सोचना नही पड़ता था। और आज ऐसी ही कुछ बात मुझे मनोज इस्तेवाल जी ने कही, ये शायद आपकी सबसे बड़ी खूबी थी कि आप उम्र में फर्क महसूस नही होने देते थे अपने से छोटो को।

 

अपने गांव, अपनी भूमि से हमेशा लगाव रहा आपको। गांव को लेकर हमेशा कुछ ना कुछ प्लान्स रहते थे आपके मन में। साकिलबाड़ी प्रोजेक्ट भी शायद उसकी ही उपज था;

 

जब भी बात होती थी, तो हमेशा साकिलबाड़ी (गांव) जाने की बात करते थे लॉक डाउन खत्म होने के बाद।

ट्रैकिंग, फोटोग्राफी और लिखने का भी बहुत शौक था। टोपी (कैप्स) और जूते का तो पुछिये मत, जब भी अपने मन से कुछ लाके दो तो बोलते थे, जूते दिलाया दिया कर बाकी कुछ नही चाहिए।

 

बड़े भैया से बहुत नजदीक थे, उनकी चिंता , उनके बारे में हमेशा सोचते रहते थे। हमेशा के तरह ,आखिरी वक़्त में भी भैया साथ थे आपके और सेवा भी उसने ही करी।

 

बस इस बात का मलाल रहेगा कि अंतिम समय में आपसे बात नही हो पाई ,आपके साथ नही था, एक आखिरी बार प्यार से 'पुत्तर' सुन्ना रह गया;और भी बहुत कुछ कहना सुन्ना बाकी रह गया।

पापा, पर आप चिंता मत करना, जितने काम अधूरे रह गए है, हम सब मिल कर पूरे कर देंगे; माँ की चिंता भी मत करना, उनका पूरा ख्याल रखेंगे।

 

एक कोशिश करी है आपकी तरह लिखने की; सोचा आपको इससे अच्छी श्रद्धाजंली क्या होगी कि आपके बारे में लिख के शेयर करूं। आपके फीडबैक का इंतज़ार रहेगा और आपकी Glenfiddich भी रखी हुई है जो आप पिछली बार आप से छूट गयी थी।



 

ईश्वर आपको श्री चरणों में स्थान दे।

ॐ शांति।



शांतनु/प्रांजल