ढकाड़ा गांव में केदार कुण्ड


||ढकाड़ा गांव में केदार कुण्ड||


यमुना घाटी में केदार कुण्ड का होना आश्चर्य जनक है क्योकि केदारनाथ और यमुना घाटी में कोसों का अन्तर है। ढकाडा गांव के लोग टौंस घाटी, जिसे बावर क्षेत्र कहते है के वास्तिल गांव से आये है। एक जनश्रुति है कि ढकाड़ा गांव का एक व्यक्ति जिन्हे वर्तमान में सयाणा परिवार कहते है ने केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री की पद यात्रा की थी उन्हे केदारनाथ की सिद्धी प्राप्त हुई। 


उन्हें स्नान के लिए जब गंगा जल की आवश्यकता पडती थी तो बड़ा संकट झेलना पड़ता था किन्तु उन्होने केदार नाथ की स्तुति की और भगवान केदार नाथ ने ढकाडा गांव में एक कुण्ड की उत्पति कर डाली। रात्री खुलने पर यहां कुण्ड दिखाई दिया फोरन उक्त व्यक्ति ने ग्रमीणों को एकत्रित किया और वहां पूजा अर्चना करके कुण्ड की प्रतिस्थापना कर डाली। इस कुण्ड का पानी हल्का सा हरा एंव साफ है। इसमें मछलियां भी है इसका जलाभिषेक करने से लोग अपने को भाग्यशाली मानते है। स्थानीय लोगों का इस पानी पर आध्यात्मिक रूप से लगाव है।


कुण्ड की उत्पति के पश्चात वह व्यक्ति रोजाना स्नान इस कुण्ड के पानी से ही करता था। आज भी उनकी पीड़ी इस प्रथा को बचाये हुए है। इनके मकान के पास एक दूसरा कुण्ड भी है जो मिट्टी से दब गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस गांव में खुदाई होगी तो पता नही क्या-क्या निकलेगा। यही वजह है कि उस परिवार के लोग दूसरे कुण्ड की जानकारी किसी को भी नही देते। 


यह कुण्ड 1803 और 1991 के विनाशकारी भूकम्प से भी प्रभावित नही हुआ और इसका पानी न तो घटता है और न बढता है जिसे लोग देवशक्ति मानते है।