गुमनाम हो गये हम


गुमनाम हो गये हम


मेरे दर्द से तो कभी, 
रूबरू तक न हो सके,
फिर कैसे समझ पाते, 
किस दर्द से गुजरे हैं हम।
बडी कशमकश भर गयी ज़िन्दगी में,
कि जानकर भी अन्जान हो गये हम।
मुहब्बत में मकां हो नाम का,
मगर बदनाम हो गये हम।
बेमिसाल हर रंग है जमाने का,
मगर बदरंग हो गये हम।
लबादा ओढ़कर खामोशी का,
इस ज़हाँ में गुमनाम हो गये हम।


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