मतदान और उम्मीदवार के सहयोगी के लिए चुनावी कायदे

||मतदान और उम्मीदवार के सहयोगी के लिए चुनावी कायदे||


आगामी 5 व 6 नवम्बर को उतराखण्ड में जिला पंचायतो के अध्यक्षो, उपाध्यक्षो और क्षेत्र पंचायतो के प्रमुखो, जेष्ठ प्रमुखो, कनिष्क प्रमुखो के चुनाव होने है। इस बावत प्रशासन ने नियम-कानून बना दिये है और इस हेतु आचार संहिता भी लागू कर दी है। यह कानून उन पर लागू होगा जो उम्मीदवार अपने साथ एक सहयोगी रखने की मांग करता हो।


क्षेत्र पंचायत प्रमुख/उप प्रमुखों के निर्वाचन में निर्वाचक की अन्धता या अन्य अशक्तता के कारण सहायक/साथी उपलब्ध कराना।


उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत(प्रमुख और उप-प्रमुख का निर्वाचन और निर्वाचन विवादों का निपटारा नियमावली, 1994(उत्तराखण्ड में यथा प्रवृत्त) के नियम-25(7) के अन्तर्गत अन्धता या अन्य अशक्तता के कारण निर्वाचन अधिकारी के समाधान के पश्चात्, निर्वाचक द्वारा मतदान में सहायता के लिए अपने साथ एक सहायक/साथी को ले जाने का प्राविधान है। ऐसे निर्वाचक (मतदाता) को सहायक/साथी उपलब्ध कराने की परिस्थिति, दशाएं एवं रीति के संबंध में आयोग द्वारा “भारत का संविधान के अनुच्छेद 243 ट एवं उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 (यथासंशोधित, 2019) की धारा-59 की उपधारा (1) एवम् (2) के अन्तर्गत प्राप्त अधिकारों के अधीन निम्न आदेश पारित किये जाते हैं:


1- उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 (यथासंशोधित, 2019) की धारा-53(1)(थ) द्वारा सदस्य क्षेत्र पंचायत की शैक्षिक योग्यता निर्धारित/प्राविधानित हैकोई भी निर्वाचकं (क्षेत्र पंचायत सदस्य) इस आधार पर सहायक/साथी की मांग नहीं कर सकता है कि वह उम्मीदवार का नाम नहीं पढ़ सकता है अथवा उसे अंकों का ज्ञान/ बोध नहीं है।


2- यदि निर्वाचक अपनी अन्धता या अन्य अशक्तता के कारण सहायक की मांग करे तो उसे जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी/मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का यह प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा कि वह अन्धता या अन्य अशक्तता से इस स्तर तक ग्रसित है कि वह अपना मतदान करने में अक्षम हैउसे अपनी अन्धता या अशक्तता का पुराना/नया विवरण भी उक्त प्रमाण पत्र के साथ संलग्न कर समस्त अभिलेखीय साक्ष्य जिलाधिकारी को प्रस्तुत करना होगा जिस पर जिलाधिकारी द्वारा अपना समाधान होने पर पुष्टि स्वरूप प्रति हस्ताक्षर किया जायेगासाथ ही उसकी अन्धता या अन्य अशक्तता के सम्बन्ध में यह भी पुष्टि कर ली जाय कि क्या उस निर्वाचक व्यक्ति के द्वारा अपने क्षेत्र पंचायत के सदस्य पद के निर्वाचन में मतदान करते समय भी अपनी अन्धता/अशक्तता के कारण किसी सहायक/साथी की मांग करके मतदान किया गया था.


3- यदि किसी निर्वाचक को सहायक/साधी दिया जाये तो उस विषय में यह सुनिश्चित भी किया जाय कि वह (क) 21 वर्ष से कम आयु का न हो. (ख). वह अराजनैतिक हो तथा इस निर्वाचन में खडे प्रत्याशियों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रिश्तेदार न हो। (ग) सहायक/साथी निर्विवादित होना चाहिए और प्रश्नगत निर्वाचन में एक से अधिक निर्वाचक/सदस्य के साथी के रूप में कार्य करने के लिए अर्ह नहीं होगा।


4- क्षेत्र पंचायत के प्रमख एवं उप प्रमुख के पदों के निर्वाचन में संबंधित क्षेत्र पंचायत के सदस्य (निर्वाचक) को अपनी अन्धता या अन्य अशक्तता के कारण सहायक की मांग करने की दशा में जिला निर्वाचन अधिकारी/उप जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रश्नगत निर्वाचन के मतदान के प्रारम्भ होने के 72 घंटे पूर्व उक्त्त प्रमाण-पत्र एवं अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा और तत्संबंधी सचना जिला निर्वाचन अधिकारी/उप जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा उसी दिन पंचास्थानि निर्वाचन कार्यालय के सचना पट पर तथा जिले के स्थानीय प्रमुख दैनिक समाचार-पत्रों में भी अवश्य प्रकाशित करा दी जाय ताकि जन-साधारण को भी इस तथ्य की जानकारी हो सके और यदि इस संबंध में कोई अन्यथा सूचना/आपत्ति प्राप्त हो तो उसका निवारण/निस्तारण भी परीक्षण के समय कर लिया जाय। जिला निर्वाचन अधिकारी उपरोक्तानुसार समस्त तथ्यों का परीक्षण कर अपने मत अभिलिखित करते हुए निर्णय लेंगे कि निर्वाचक को सहायक/साथी अनुमन्य करने का निर्दिष्ट व्यवस्थानुसार औचित्य बन पड़ता है अथवा नहींनिर्वाचन अधिकारी द्वारा अपना समाधान हो जाने के उपरान्त निर्वाचक को सहायक/साथी ले जाने की अनुमति दी जा सकेगी।


इस संबंध में लिये गये निर्णय से आयोग को भी मतदान प्रारम्भ होने के 48 घंटे पूर्व अवगत कराया जायेगा। यदि सहायक/साथी उपलब्ध कराने संबंधी निर्णय की जानकारी मतदान प्रारम्भ होने के 48 घंटे पूर्व आयोग को नहीं दी गई तो यह समझा जायेगा कि उक्त्त आदेश आयोग के निर्देशों के अनुरूप नहीं है और सहायक/साथी उपलब्ध कराने संबंधी ऐसी अनुमति को आयोग द्वारा निरस्त कर दिया जायेगा जिसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी.


5-यदि सहायक की मांग मतदान प्रारम्भ होने के 72 घंटे के पूर्व प्राप्त नहीं होती है तो किसी भी निर्वाचक को सहायक/साथी स्वीकृत नहीं किया जायेगापरन्तु आपातकालीन परिस्थिति जैसे अचानक दुर्घटना की स्थिति में निर्दिष्ट व्यवस्था के अनुरूप सहायक की मांग, हेतु आवेदन-पत्र प्राप्त होने पर जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा समस्त तथ्यों को आयोग के संज्ञान में लाते हुए आयोग के परामर्श से ही सहायक/साथी को अनुमन्य कराया जा सकेगा।


निर्वाचक के सहायक को इस आशय का घोषणा-पत्र भी देना होगा कि वह इस निर्वाचन में केवल एक निर्वाचक के सहायक/साथी का कार्य कर रहा है और किसी अन्य निर्वाचक के सहायक/साथी का कार्य उस दिन न तो किया है न उस दिन करेगा।


6-यदि निर्वाचक द्वारा सहायक/साथी की मांग, हेतु प्रस्तुत शपथ-पत्र/प्रमाण-पत्र, अभिलेखीय साक्ष्य परीक्षण के समय असत्य, कपटपूर्ण एवं तथ्यों को छिपाना प्रथम दृष्टया साबित हो तो ऐसे व्यक्ति/व्यक्तियों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत अपराधिक कृत्यों के लिए थाने में प्राथमिकी(एफ0आई0आर0) भी दर्ज करायी जा सकती है/प्राथमिकी(एफ0आई0आर0) भी दर्ज करायी जा सकती है.


7-इन निर्देशों के अधीन ही उपरोक्त निर्वाचकों को सहायक/साथी उपलब्ध कराया जायेगा.. 8-निर्वाचन अधिकारी उपरोक्त सम्बन्धी सभी मामलों का नियमानुसार निर्धारित प्रपत्र-7-क में एक अभिलेख रखेंगे


मार्फत - (चन्द्रशेखर भट्ट) राज्य निर्वाचन आयुक्त।