चकबंदी हो पहाड़ों में सरकार मजबूती से कदम तो उठाये


||चकबंदी हो पहाड़ों में सरकार मजबूती से कदम तो उठाये||


गणेश सिंह गरीब जी इस बात को दशकों से अनेक मंचों पर उठा चुके। आज वे उम्रदराज हो चुके। अब इस मुहीम को कुछ और लोगों ने उठा लिया और अलग अलग मंचों से आवाज दे रहे। अपने परिचित हैं केवलानन्द तिवारी जी वे पूरे जोश में इसका कुछ डाटा भी खुद तैयार कर चुके। सरकार को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता।


खुद वर्तमान मुख्यमंत्री जी कभी चकबंदी के बड़े पैरोकार और कमेटी के मुखिया रहे थे।
उत्तराखंड के पर्वतीय भू भाग को यदि लोगों के रहने लायक बनाना है तो सरकार को अनिवार्य चकबंदी की बात लागू करनी पड़ेगी।4000 गाँव खाली हो गये।301 प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुके। इन 19 सालों में 20 लाख करीब लोग घर छोड़ चुके है।


खेती की जमीनें बिखरी,असिंचित,विवादास्पद और बहुत कम मात्रा में रह गयी हैं। उसमें भी खनन,विकास के सभी कार्य,और बांध का कार्य हो रहा है। अब लोग इससे गुजारा करें भी तो कैसे?
जो लोग खेती बागवानी करते भी हैं उनके श्रम को सुवर बंदरों ने नष्ट करना शुरू किया ।अब ये स्थिति इतनी दुखद हो चुकी कि बड़े बड़े सेरे तक गैर आबाद हो चुके हैं। प्रदेश में भूमि सुधार या बन्दोबस्त साठ के बाद नहं किया गया है।8 प्रकार की भूमि को उत्तर प्रदेश से अलग होने के दरमियान खुर्द बुर्द कर दिया गया है।


गौचर,श्मशान,पनघट,खाम,वर्गा 4 व् 5,देव वन भूमि का तो पता ही नहीं है। लोगों के पास जब राज्य की कुल कृषि भूमि की मात्र 7 प्रतिशत की ही मालकियत है तो पर्वतीय भू भाग से पलायन तो करना मजबूरी है ही।


राज्य के मैदानी भू भाग में जमीनों को लगभग मुफ्त ही उद्योगों को दिया जा चुका है। जो सब्सिडी डकार कर खिसकने लगे हैं। कुछ बड़े किसान हैं जिन्होंने कभी उधम सिंह नगर जिला अलग करवा लिया था। उन पर अब कोई सरकार हाथ डालने की हिम्मत नहीं करती है।


पहाड़ों की चोटियों पर देश भर के अनजाने लोगों का कब्जा हो चुका है। वे कहीं धर्मशालाएं तो कहीं होटल खोलकर आसपास के जल जंगल जमीन वन्य जीवन और वातावरण को नुकसान करने में जुटे हैं।


भूमि सुधार एक सख्त जरूरत है। चकबंदी उसका अगला व्यवस्थागत कदम हो सकता है। उससे भी जरूरी कार्य ये है कि राज्य की सरकार पर्वतीय ग्रामों में जीने के लिए जो जरूरी भूमि वन और प्राकृतिक संसाधन चाहिए उसे स्पष्ट करे। जो लोग दशकों से गाँव से बाहर हैं उनसे पैतृक जमीनों को लेकर उनको दे जो कमा खा रहे।