कोरोना संकट: होम क्वारनटीन नहीं, होम कारावास कहिए

||कोरोना संकट: होम क्वारनटीन नहीं, होम कारावास कहिए||



- गुजरात के सूरत से यह कोरोना उत्तरकाशी के एक युवक पर सवार होकर सीधा जनपद मुख्यालय में प्रवेश कर गया।
- ऐसे सैकड़ो परिवार हैं जो गांव की स्कूल या पंचायत भवन में होम क्वारनटीन का समय बिताने के लिए तैयार हैं।
- एक तरफ नियम-कानून, कोरोना महामारी से बचने के लिए सामाजिक दूरियां और दूसरी तरफ गांव की इन स्कूलो में ना तो सही सलामत छत है, ना खिड़कीयां ना ही व्यवस्थित दरवाजे।
- क्वारनटीन हो चुके लोगो की समस्या को अधिकारी, कर्मचारी व सथानीय जनप्रतिनिधि सुनने के लिए तैयार नहीं है।
- होम क्वारनटीन में 14 दिन तक अलग हवादार कमरे में रहना है। अपने हाथों को बार-बार साबुन या पानी से धोये या अल्कोहल आधारित सैनिटाईजर का प्रयोग करें। हमेशा मास्क पहने। स्वच्छता का विशेष ध्यान रहे। एक दूसरे सदस्य से अचित दूरी बनाये रखे, खासकर बुजुर्ग और बच्चो से। अपने कपड़े या बर्तन दूसरों से साझा ना करे। इन सुविधाओं का ग्राम स्तर पर बनाये गये होम क्वारीनटीन केन्द्रो पर अभाव बना हुआ है।




सोचा था कि उत्तरकाशी जनपद भी कोरोना मुक्त है। मगर किसको क्या मालूम था कि गुजरात के सूरत से यह कोरोना उत्तरकाशी के एक युवक पर सवार होकर सीधा जनपद मुख्यालय में प्रवेश कर देगा। चूंकि जिला प्रशासन उत्तरकाशी ने चाक-चैबन्द व्यवस्था की हुई है। इसलिए कोरोना के और खतरों के बढने की संभावना कम है। किन्तु कोरोना पोजेटिव के मामलो में सतर्क रहना लाजमी है। मगर जो लोग अलग-अलग जगहो से अपने-अपने गांव पंहुचे है। उनके सामने क्वारीनटीन का समय पूरा करना भी संकट बनकर उभर रहा है।


बता दें कि अभी हाल ही में चार मई के बाद देहरादून से विकासखण्ड नौगांव के मंजियाली गांव का एक परिवार देहरादून से गांव पंहुचा। पंहुचते ही उन्हे ग्राम पंचायत ने गांव के एक स्कूल में क्वारीनटीन कर दिया। यह परिवार 22 मार्च के पूर्व से ही देहरादून स्थित अपने ही घर में रह रहा था। अब गांव में कुछ खेतीबाड़ी का काम आरम्भ होना था, सो सरकारी अनुमति लेकर यह परिवार मंजियाली गांव भी राज्य सरकार की वाहन व्यवस्था से पंहुच गया। उन्होंने यह भी तय किया था कि मंजियाली गांव में भी यदि उन्हे होम क्वारीनटीन होना पड़े तो वे अपने ही घर में कर सकते है। क्योंकि उनके अलावा कोई और सदस्या उनके परिवार में हैं ही नहीं। उन्हें ही अपने घर का दरवाजा खोलना है। 


वे तब भौचके रह गये जब ग्राम प्रधान ने उन्हे जिला प्रशासन का फरमान सुनाया कि गांव में बाहर से आने वाले नागरिक को सरकारी स्कूल या पंचायत भवन में 14 दिन का होम क्वारीनटीन करना होगा। उन्हे भी करना है। क्योंकि वे तो देहरादून जैसे शहर से गांव पंहुच रहे है। वैसे भी देहरादून में कोरोना वायरस के मामले में संदेह के घेरे में है। वे भी क्या कर सकते थे, उन्होंने सहज ही नियम-कानून को स्वीकार किया और उन्हें गांव की प्राथमिक स्कूल में होम क्वारीनटीन कर दिया गया। अतएव ऐसे सैकड़ो परिवार हैं जो गांव की स्कूल या पंचायत भवन में होम क्वारनटीन का समय बिताने के लिए तैयार हैं।


बता दें कि ऐसे नागरिको के लिए गांव में दो-धारी तलवार जैसी स्थिति हो चुकी है। एक तरफ नियम-कानून, कोरोना महामारी से बचने के लिए सामाजिक दूरियां और दूसरी तरफ गांव की इन स्कूलो में ना तो सही सलामत छत है, ना खिड़कीयां है। स्कूल का फर्स भी ऐसा कि वहां बैठना तो दूर खड़े रहने की हिम्मत भी नहीं होती है। विस्तर, स्वच्छ शौचालय, खान-पान की व्यवस्था तो इन स्कूलो में दूर की कौडी लगती है। अब ये परिवार 14 दिन होम क्वारीनटीन नहीं अपितु 14 दिन का होम कारावास भुगतने के लिए तैयार है। इनका कहना है कि उनकी समस्या को कोई भी अधिकारी, कर्मचारी सुनने के लिए तैयार नहीं है। जो परिवार होम क्वारीनटीन हो रखे है, उनकी मांग है कि ऐसे स्कूलो में ग्राम प्रधान या स्थानीय प्रशासन को रहने-खाने की पुख्ता व्यवस्था कर देने चाहिए। इधर जिला प्रशासन की तरफ से जिले में बनाये गये कन्ट्रोल रूम में बैठे कर्मचारी भी आलाधिकारीयो का हवाला देते हुए अपना पला झाड़ देते है। यही नहीं ग्राम पंचायत अधिकारी, या अन्य विभागो के अधिकारी जिन्हे होम क्वारनटीन करने वालो की जांच की जिम्मेदारी दी गई है, वे भी नियम कानून का पाठ पढाकर चुप करवा देते है।


ताज्जुब तो यह हैं कि कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी, अधिकारी यहां तक कि स्थानीय जनप्रतिनिधि भी होम क्वारीनटीन हो चुके लोगो की समस्या को सुनने के लिए तैयार नहीं है। ना ही ऐसे केन्द्रो पर अचित व्यवस्था देने के लिए कोई समाजसेवी या प्रशासनिक व्यवस्था आगे आ रही है।


उल्लेखनीय हो कि केन्द्र सरकार की होम क्वारीनटीन की गाईडलाईन कहती है कि अमुक नागरिक को 14 दिन तक अलग हवादार कमरे में रहना होगा। अपने हाथों को बार-बार साबुन या पानी से धोये या अल्कोहल आधारित सैनिटाईजर का प्रयोग करें। हमेशा मास्क पहने। स्वच्छता का विशेष ध्यान रहे। एक दूसरे सदस्य से अचित दूरी बनाये रखे, खासकर बुजुर्ग और बच्चो से। अपने कपड़े या बर्तन दूसरों से साझा ना करे। कुलमिलाकर इन सुविधाओं का ग्राम स्तर पर बनाये गये होम क्वारीनटीन केन्द्रो पर बिल्कुल अभाव बना हुआ है। ये लोग इसे अब 14 दिन का होम कारावास मानकर किसी से अपनी बात नहीं बता पा रहे है।